अल्फ्रेड नोबेल जीवन [Biography]

    अल्फ्रेड नोबेल जीवन

विश्व में ऐसी विलक्षण प्रतिभाए दुर्लभ भी होती है जिनकी धन-संपदा और वैभव मानवता के लिए समर्पित होता है यह भी हमारा मात्र भ्रम है कि कोई वैज्ञानिक के किसी एक देश का होता है! सत्य तो यह है कि वैज्ञानिक सत्य की खोज में अपना जीवन अर्पण कर मानवता के लिए कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है सत्य की खोज में अपना जीवन एवं वैभव लुटाने वाला ऐसा ही वैज्ञानिक था– अल्फ्रेड नोबेल, जिसने अपनी अपार संपत्ति अपने वसीयतनामे द्वारा, विश्व के वैज्ञानिक तथा शांति स्थापित करने वाले शांति दूतों को समर्पित कर दी. अल्फ्रेड नोबेल की विशाल धन-संपदा नोबेल फाउंडेशन ट्रस्ट में सुरक्षित है ब्याज द्वारा दुनिया का सर्वाधिक सम्मानित नोबेल पुरस्कार प्रतिवर्ष विश्व के लब्ध वैज्ञानिकों को, लखनिया योगदान के लिए 10 दिसंबर को वितरित किया जाता है! यह पुरस्कार भौतिक रसायन व चिकित्सा विज्ञान के अतिरिक्त साहित्य व शांति के लिए विशेष योगदान पर भी दिया जाता है वर्ष 1969 में अर्थशास्त्र विषय भी इस पुरस्कार से सम्मिलित किया गया है वर्ष 1901 में पहली बार नोवेल की याद में यह पुरस्कार आरंभ हुआ. जिसे पाने वाले प्रथम भाग्यशाली व्यक्ति थे– भौतिक में एक्स किरणों की खोज करने वाले W.K RONTZAN, शांति के लिए फ्रेंडरिक पासी, रसायन में J.H WANTHAFF, तथा चिकित्सा में मैडम क्यूरी रहे. किसी महिला को मिलने वाला मात्र पहला पुरस्कार ही प्राप्त नहीं किया! वरन् भौतिक तथा रासायनिक क्षेत्रों में अलग-अलग यह पुरस्कार प्राप्त किया! मैरी क्यूरी एक ऐसे परिवार से जुड़ी हैं, जिसने दो पीढ़ियों तक पांच नोबेल पुरस्कार जीते! अब तक तीन भारतीय नागरिक को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है! यह सम्मान प्राप्त करता है- रवींद्रनाथ टैगोर सन 1917 में साहित्य के क्षेत्र में, सी वी रमन 1930 में भौतिकी के क्षेत्र में, तथा मदर टेरेसा 1979 में शांति का नोबल पुरस्कार! इसके अतिरिक्त विदेशी नागरिकता प्राप्त दो भारतीय वैज्ञानिक- हरगोविंद खुराना तथा सुब्रमण्यम चंद्रशेखर भी नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं!

    अल्फ्रेड नोबेल का जन्म

यनामाइट विस्फोट की जगत में अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 21 अक्टूबर 1833 को स्टॉकहोम स्वीडन में हुआ! बाल्यकाल सेट पीटर्सवर्ग में बीता! इनके पिता ईमेन्यू का सेट पीटर्सवर्ग मैं नाइट्रो ग्लिसरीन का उद्योग था! जिसका उपयोग विस्फोटक के रूप में किया जाता था! यह रसायन उन दिनों ब्लास्टिंग आयन के नाम से जाना जाता था! नोबेल के पिता को इस उद्योग के आरंभ से ही दुखद दुर्घटना का सामना करना पड़ा! 1849 ईस्वी में इनकी कंपनी के दिवालिया हो जाने के पश्चात नोवेल ने स्वीडन वापस आकर नाइट्रोग्लिसरीन का उत्पादक प्रारंभ कर दिया किंतु 1864 में इनके कारखाने में 1 दिन भीषण विस्फोट हुआ! जिससे उद्योग में कार्यरत कई कामगार मजदूर और अल्फ्रेड नोबेल के सबसे छोटे भाई की मृत्यु हो गई! पूरी इमारत भी ध्वस्त होकर रह गई! स्वीडेन सरकार द्वारा कारखाने के पुनर्निर्माण की अनुमति न मिलने के बावजूद नोबल ने मालारेंज सरोवर पर बांध निर्माण करके उत्पादन जारी रखा! इसके कार्य नाइट्रोग्लिसरीन के सुरक्षित परिवहन पर केंद्रित था! एक दिन अचानक ही इन्हें अपने उद्देश्य में आकस्मिक रुप से सफलता प्राप्त हो गई! एक दिन अचानक ही अल्फ्रेड नोबेल ने पाया कि एक विशेष कार्बनिक पैकेट ने नाइट्रोग्लिसरीन अवशोषित होकर शुष्क पदार्थ में नहीं तो हो जाती है इस प्रकार इस विस्फोट का हैंडलिंग सुरक्षित हो गया था! इस नई खोज से नोबेल डायनामाइट का निर्माण करने में सफल हुए!

    अल्फ्रेड नोबेल का खोज

अल्फ्रेड अपनी इस खोज से बहुत उत्साहित हुए! से डायनामाइट का परिवहन सुरक्षित तथा सरल हो गया! क्योंकि विस्फोट की घटनाओं के कारण, कोई भी परिवहन व्यवस्था नाइट्रोग्लिसरीन को लाने ले जाने के लिए तैयार ना होती थी! उन्हें 1867 ईस्वी में डायनामाइट का ब्रिटिश पेटेंट तथा 1868 में अमरीकी पेटेंट मिला! 1889 में उन्होंने बैलेंसडाइट नामक बिना धुएं का विस्फोटक बनाया! कुल 335 पेटेंट, नोबेल ने तैयार किए, जिसमें कृत्रिम रबड़ चमड़े तथा कृत्रिम रेशम पेटेंट भी थे! उन्होंने विस्फोट का विशाल कारखाना बनवाया! इस प्रकार उन्होंने अपने लिए अपार धन एकत्र कर लिए थे! नई खोज के बाद नोबेल ने उद्योग की प्रतिष्ठा बढ़ गई थी! क्योंकि डायनामाइट द्वारा सुरक्षित विस्फोट द्वारा चट्टानें उड़ाने का काम किया जाने लगा था! जिससे सड़क, पुल आदि शीघ्र तथा बिना दुर्घटना के तीव्र गति से बढ़ने लगे! यह के धनी अल्फ्रेड नोबेल के साथ एक और अनहोनी हुई जिसमें वह 1875 में दूसरी सफल खोज कर पाए!

    अल्फ्रेड नोबेल का दूसरी खोज

1875 में प्रयोग के तौर पर अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी थोड़ी उंगली कट जाने पर उस पर कोलाडीयान पदार्थ लगाया! उसने पाया कि nitroglycerin की collodion से क्रिया द्वारा प्लास्टिक जैसी पदार्थ बन जाती है! यह जानकर उन्होंने दोनों पदार्थों को साथ मिलाकर गर्म किया! इस आश्चर्यजनक प्रयोग द्वारा उसे ज्ञात हुआ कि प्राप्त हुआ प्लास्टिकनुमा पदार्थ, डायनामाइट से अधिक विस्फोट शक्ति रखता है! नोबेल ने इसका नाम डायनामाइट गम रखा!

    अल्फ्रेड नोबेल की मृत्यु

विस्फोट के व्यापार में सफलता के बाद अल्फ्रेड नोबेल की यही हार्दिक अभिलाषा थी. कि वह कोई ऐसे पदार्थ है या मशीन का आविष्कार करें, जिससे भयानक परिणाम से दुनिया इतनी घबरा जाए कि युद्ध संभव हो जाए, अल्फ्रेड कि इस अभिलाषा की पुष्टि उनकी एक मित्र लेखिका ने अपनी पुस्तक ‘” lay down your arms'” मैं की है वह मृत्युपर्यंत अविवाहित रहे! अल्फ्रेड नोबेल की 10 दिसंबर 1896 को विस्फोटकों के परीक्षण में दुखद मृत्यु हो गई! अपनी विरासत के 91 लाख डॉलर की संपदा से वैज्ञानिको साहित्यकारों तथा शांति हेतु उल्लेखनीय कार्य करने वालों को पुरस्कृत करने की वसीयत की.1901 में प्रारंभ इस पुरस्कार की राशि 800000 रुपए के समतुल्य थी! उसके साथ प्रशांति पत्र भी दिया जाता था! 1969 में नेशनल बैंक ऑफ स्वीडन द्वारा अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार दिया जाने लगा! यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को दिया जाता है वर्ष 1990 में इस पुरस्कार की राशि मुद्रा के घटते मूल्य के कारण पुरस्कार का महत्व देखते हुए बढ़ा दी गई है, ताकि पुरस्कार का मूल्य 1901की राशि के तुल्य रहे! नोबेल फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष रोमन ने यह निर्णय नोबेल पुरस्कार का महत्व बनाए रखने के उद्देश्य से लिया! इंटरनेशनल रेड क्रॉस कमेटी को शांति के लिए तीन बार यह पुरस्कार मिल चुका है! John bardeen, marie Curie, friendreq cigar, leenar polling को दो बार यह पुरस्कार मिल चुका है संयुक्त राष्ट्र उच्चआयुक्त कार्यालय को भी शांति के लिए दो बार नोबेल पुरस्कार मिल चुका है! सर्वाधिक नोबेल पुरस्कार अमेरिका वासियों को तथा इसके पश्चात ब्रिटिश नागरिकों को प्राप्त हुए हैं!

    परिणाम

अल्फ्रेड नोबेल अपनी मृत्यु के पंचानवे वर्ष बाद भी अमर हैं क्योंकि उनके आविष्कार मानवता के कल्याण के लिए हैं! अप्रत्यक्ष रुप से देखें तो पाएंगे कि आज के युग की प्रगति में नोबेल का महान योगदान है क्योंकि आज भी सड़क बनाने सुरंग खोदने बांध बनाने में डायनामाइट का प्रयोग किया जाता है! ऐसे वैज्ञानिक मर कर भी अमर रहते हैं! और सारा विश्व उन्हें सम्मान करता है क्योंकि उनका सारा जीवन देश धर्म और संप्रदाय से मुक्त समूची मानवता के लिए समर्पित होता है!

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