नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जिंदगी [BIOGRAPHY OF NAWAZUDDIN SIDDIQUI]

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जिंदगी [BIOGRAPHY OF NAWAZUDDIN SIDDIQUI]


आज बात करने जा रहे हैं ऐसे एक्टर की जिसे किसी फिल्म में एक बड़ा रोल हासिल करने के लिए 12 साल लग गए.
लेकिन कुछ ही सालों में पूरे देश में नहीं बल्कि विदेशों में भी उन्होंने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. मैं बात करने जा रहा हूं नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जिंदगी के बारे में.
नवाजुद्दीन सिद्दीकी को भले ही 12 साल किसी फिल्म में बड़े रोल को प्राप्त करने के लिए लग गए. मगर प्राप्त करने की कुछ ही वर्ष पश्चात उन्होंने पूरी दुनिया में अपने अभिनय का लोहा मनवाया.
एक समय था. जब किसी निर्देशक के पास में काम मांगने जाते थे. वहां से उन्हें यह कह कर निकाल दिया जाता था. कि मेरी फिल्में मैं कोई पात्र खाली नहीं बचे हैं. जो मैं तुम्हें दे सकू.

जाहिर सी बात है कोई भी निर्देशक अपनी फिल्म के लिए एक सांवले, छोटे हाइट वाले व्यक्ति को क्यों लेगा?

    परिचय


नसरुद्दीन सिद्दीकी का जन्म 1974 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुआ था. 9 भाई बहनों के बीच नवाब सबसे बड़े हैं. उनके पिता एक किसान हैं और वह बताते हैं, आप पूरे साल पैसे जुटाता था और ईद या दिवाली के समय शहर जाकर फिल्म देखता था.
नमाज शुरु से ही अपने गांव से निकलना चाहते थे, वजह यह थी कि वहां का माहौल ठीक नहीं था.
नवाब कहते हैं, कि उनके गांव में लोग तीन ही चीज जानते हैं. गेहूं, गन्ना तथा गन!
माहौल अच्छा ना होने की वजह से वह हरिद्वार चले गए. जहां वह केमिस्ट्री में बीएससी की पढ़ाई पूरी की. उसके बाद मैं बड़ोदरा गुजरात में एक बड़ी कंपनी में बतौर केमिस्ट काम करने लगे. इस काम में उनका मन नहीं लगता था मगर पैसे के लिए कुछ ना कुछ तो करना पड़ता.
एक दिन उनके दोस्त ने उन्हें एक गुजराती नाटक दिखाया. जिसे देख कर उन्हें मजा आ गया. और उनके अंदर से ऐसी अनुभूति हुई कि शायद यही वह काम है, जिसके लिए वह पैदा हुए हैं! लेकिन वह समझ नहीं पा रहे थे कि शुरुआत कहां से की जाए.
एक्टिंग करने का सपना लिए वह दिल्ली आ गए. दिल्ली आकर उन्होंने कुछ नाटक देखें तभी वह अभिनेता बनने का दृढ़ निश्चय कर लिया.
फिर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से उन्होंने एक्टिंग सीखे. 4 साल तक वे दिल्ली में रहे तथा छोटे-मोटे रोल प्ले किए. लेकिन उनसे उनका खर्च नहीं चल पा रहा था. सन 2000 में वह मुंबई इस आस में आ गए. कि उन्हें किसी टीवी सीरियल में छोटा रोल भी प्राप्त हो जाएगा. जिससे उनका जीवन पटरी पर आ जाएगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ सीरियल में भी उन्हें काम नहीं मिला.
नवाज ने बताया, कि अपने शुरुआती समय में वह हर जगह अपना प्रोफाइल देते रहे तथा कहीं से भी उन्हें फोन नहीं आया. भिखारी का रोल अदा करने के लिए भी डायरेक्टर को 6 फीट का आदमी चाहिए होता था और मुझे जैसे छोटे कद के सांवले एक्टर को लेना कोई पसंद नहीं करता था.


थोड़े पैसों के लिए वॉचमैन की जॉब


नवाज के पास बिलकुल भी पैसे नहीं बचे थे और उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के एक सीनियर से मदद मांगी और उसने एक शर्त में नवाजुद्दीन को रखा की घर का पूरा काम तुम्हें ही करना पड़ेगा थोड़े पैसों के लिए उन्होंने वॉचमैन की जॉब कर ली. वह सुबह से शाम तक जॉब करते तथा शाम के बाद थिएटर करते थे. सीरियल में काम ना मिलने के बाद नवाज ने फिल्मों में छोटे-मोटे रोल ढूंढना प्रारंभ किया.
बड़ी कठिनाइयों के बाद कुछ रोल मिला. लेकिन उनके शुरूआती के दिन बड़े कठिनाई पूर्ण थे. उनका एक्टिंग धक्कामार तक ही सीमित रह जाता था.
उन्होंने हार नहीं मानी तथा इसी आस पर बैठे रहते कि कभी ना कभी उन्हें एक बड़ी भूमिका जरूर मिलेगी. एक समय ऐसा भी था, कि उनके पास खाना खाने को पैसा नहीं था. तब उन्हें लगता था कि उन्हें गांव वापस चले जाना चाहिए और दूसरे ही पल में यह सोचते कि क्या मुंह लेकर वह वापस गांव जाएंगे?
एक बार डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने उनका एक हिंदी नाटक देखा. नवाज की एक्टिंग देखकर वे अत्यंत प्रभावित हुए तथा ब्लैक फ्राइडे में उन्होंने उनका रोल बढ़ाया. जिसे नवाज ने बखूबी निभाया. वही से उन्हें सफलता मिलने प्रारंभ हुई. सफलता मिलने की वजह से उनकी पैसों की समस्या काफी हद तक कम हो गई थी. लेकिन अभी भी वह संतुष्ट नहीं थे और अपना बेस्ट दे रहे थे. नवाज की जुनूनीयत को देखते हुए अनुराग कश्यप ने उन्हें साइड स्टार से स्टार बनाने का सोच लिया और गैंग्स ऑफ वासेपुर में उन्हें लीड रोल प्राप्त हुआ. बस वहीं से नवाज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा तथा एक्टिंग में अपना बेस्ट देते हुए सफलता की एक नई ऊंचाइयों को छू लिया.
गैंग्स ऑफ वासेपुर के बाद उन्होंने मांझी द माउंटेन मैन में अपने एक्टिंग का लोहा मनवाया. बजरंगी भाई जान मैं भी उनके सपोर्टिंग रोल को बहुत सराहा गया.
उनकी कड़ी मेहनत आत्मविश्वास के कारण ना केवल वे बड़े पर्दे पर छा गए बल्कि बहुत सारे अवार्ड भी अपने नाम किए.
नवाज अपने आप को स्टार नहीं एक्टर मानते हैं उनका कहना है, वह केवल स्टार बनकर नहीं रहना चाहते वह एक एक्टर बन कर रहना चाहते हैं. क्योंकि स्टार बनने के बाद आपकी एक अलग पहचान बन जाती है और आप ठीक से घूम भी नहीं सकते.
नवाजुद्दीन सिद्दीकी में ऐसा कुछ भी नहीं था जो एक ट्रेडिशनल स्टार में होता है लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर पूरे दुनिया मैं अपने एक्टिंग का लोहा मनवाया.
अगर आपको अपने सपने को पाना है तो कभी हार ना मानो. चाहे कितनी भी कठिनाई का सामना क्यों ना करना पड़े. यहां करो या मरो वाली बात आ जाती है.

    नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी निजी जिंदगी –


सिद्दीकी अपने छोटे भाई शामस नवाब सिद्दीकी के साथ मुंबई में रहते है, उनका भाई डायरेक्टर है। नवाज़ुद्दीन ने अंजलि से शादी की है और उनकी एक बेटी शोरा और एक बेटा भी है, जिसका जन्म उनके 41 वे जन्मदिन पर हुआ था।


मुख्य रोल में सिद्दीकी


    अवार्ड –

मुख्य रोल में सिद्दीकी की पहली फिल्म पतंग को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था और इसमें उनके अभिनय की प्रसिद्ध आलोचक रॉजर एबर्ट ने काफी तारीफ़ की थी, उन्होंने इस फिल्म को 4 में से 4 स्टार दिए थे और और फिल्म में उनके रोल को भी सर्वश्रेष्ट बताया।

2012 की मुख्य चार फिल्मो में भी सिद्दीकी दिखे – कहानी (2012), गैंग्स ऑफ़ वासेपुर – पार्ट 2 (2012) और तलाश (2012), इन सभी फिल्मो में उनके अभिनय की सभी ने काफी सराहना और प्रशंसा की थी। इसके लिए उन्हें बहुत से अवार्ड भी मिले जिनमे मुख्य रूप से बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का स्क्रीन अवार्ड, बेस्ट एक्टर का जी सिने अवार्ड, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर – मेल का जी सिने अवार्ड, और गैंग्स ऑफ़ वासेपुर में उनके रोल के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का स्टारडस्ट अवार्ड शामिल है।

2012 में फिल्म कहानी, गैंग्स ऑफ़ वासेपुर, देख इंडियन सर्कस और तलाश में बेहतरीन अभिनय करने की वजह से उन्हें 60 वे नेशनल फिल्म अवार्ड में स्पेशल जूरी अवार्ड देकर सम्मानित किया गया।


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