अनुबंध अधिनियम:एक परिचय [BUSINESS CONTRACT LAW]

अनुबंध अधिनियम :एक परिचय

अनुबंध अधिनियम एक व्यापारिक महत्वपूर्ण शाखा है यह हमारे सभी के जीवन को प्रभावित करने वाला अधिनियम है! ‘”अनुबंध का विधान प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करता है क्योंकि हमारे जीवन में से प्रत्येक व्यक्ति आए दिन अनुबंध करता रहता है'”

अपने जीवन की आवश्यकता को पूरा करने घूमने फिरने के लिए टैक्सी का प्रबंध करने पढ़ने के लिए पुस्तक खरीदने या मांग कर लेने आवश्यकता की वस्तुएं मित्रों को देने या प्राप्त करने दर्जी से कपड़े सिलवाने यात्रा या मनोरंजन के लिए टिकट खरीदने आदि के लिए हम अनुबंध करते हैं एक दृष्टि से देखा जाए हमारा जीवन अनुबंध पर आधारित है
व्यवसायिक जगत में अनुबंध अधिनियम एक महत्वपूर्ण स्थान है इसके द्वारा व्यवसाय करने वाले पक्षकारों को अपने व्यापारिक अधिकारों की सुरक्षा प्राप्त होती है “‘ जिस प्रकार जनता एवं संपत्ति की सुरक्षा दंडविधान के नियमों पर निर्भर करती है उसी प्रकार व्यापारिक जगत की सुरक्षा एवं स्थिरता अनुबंधों के विधान पर निर्भर करती है'”
अनुबंध अधिनियम के बिना समस्त व्यापारिक जगत का भवन ही रह जाएगा तथा संपूर्ण व्यवहारिक लेन-देन में अनिश्चितता एवं भय का वातावरण उत्पन्न हो जाएगा! अनुबंध अधिनियम सभी पक्षकारों को अनुबंध से उत्पन्न उचित आशाओं को पूरा करने का विश्वास दिलाता है!
‘” अनुबंध अधिनियम का उद्देश्य यह देखना है कि एक व्यक्ति को जो आशा दिखाई गई है वह पूरी की जाएगी तथा उसे जो कुछ वचन दिया गया है पूरा किया जाएगा'”

 

अनुबंध अधिनियम का इतिहास

                भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 के पारित होने से पूर्व तक भारत में ऐसा कोई सामान्य अनुबंध विधान नहीं था जो कि संपूर्ण देश में समान रुप से लागू हो सके देश के उच्चतम न्यायालयों में अंग्रेजी विधान को ही निर्णयों का मूल आधार माना जाता था ! किंतु कुछ स्तर के न्यायालयों में किसी भी विशिष्ट प्रकार नहीं माना जाता था यह न्यायालय केवल समानता तथा सद्भावना के सिद्धांत के आधार पर ही निर्णय दिया करते थे
समय के परिवर्तन के साथ साथ इस संबंध में भी कुछ परिवर्तन हुआ 1781 में कोलकाता उच्च न्यायालय को तथा 1797 में मुंबई तथा मद्रास उच्च न्यायालयों को यह अधिकार दिया गया कि जहां विवाद के दोनों पक्षकार हिंदुओं वहां हिंदू विधि का प्रयोग किया जाए तथा जहां विवाद के दोनों पक्षकार मुसलमान हो वहां मुस्लिम विधि का प्रयोग किया जाए! तथा जहां विवाद का एक पक्षकार हिंदू तथा दूसरा पक्षकार मुसलमान हो वहां अनुबंध अधिनियम के कानून लागू किए जाएं!
इस प्रकार देश के विभिन्न भागों में सभी विभिन्न धर्मों एवं जातियों के लोगों के लिए अलग-अलग प्रकार का प्रयोग होता है अतः अतीत काल में ही अनुबंध अधिनियम की आवश्यकता थी किंतु यह आवश्यकता तभी पूरी हुई जब सन 1872 में भारतीय अनुबंध अधिनियम लागू हुआ.


भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 हमारे देश में 1 सितंबर 1872 में लागू किया गया यह अनुबंध है अपने प्रारंभिक अवस्था में एक व्यापक अधिनियम था जिसमे कुल 266 धाराएं और 11 अध्याय थे! तथा इसमें माल विक्रय तथा साझेदारी अनुबंध संबंधी प्रावधान भी शामिल थे किंतु व्यवसाई क्रियाओं के विस्तार के परिणाम स्वरुप अनुबंधों के लिए अलग-अलग नियमों की आवश्यकता अनुभव हुई अतः इन अनुबंध हो में संबंधित धाराएं( धारा 76 से 123 तक तथा धारा 239 से धारा 266 तक) को इस अधिनियम से निरस्त कर सन 1930 में माल विक्रय अधिनियम तथा सन 1932 में साझेदारी अधिनियम का निर्माण किया गया इस परिवर्तन के बाद वर्तमान में भारतीय अनुबंध अधिनियम की विषयवस्तु इस प्रकार से है.

1. अनुबंध की सामान्य सिद्धांत तथा अर्ध अनुबंध एक से 75 तक की धाराएं
2 हानीरक्षा तथा गारंटी अनुबंध संबंधी प्रावधान 124 से 147 तक की धाराएं
3 निक्षेप तथा गिरवी अनुबंध संबंधी प्रावधान 148 से 181 तक की धाराएं तथा
4. एजेंट अनुबंध संबंधी प्रावधान 182 से 238 तक की धाराएं

 

प्रकृति तथा विशेषताएं-

                     भारतीय अनुबंध अधिनियम की प्रकृति को स्पष्ट करने वाली प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है
1. अधिनियम की प्रभावशीलता
2. पूर्ण एवं सर्वांगीण नहीं
3. अनुबंध से उत्पन्न दायित्व की व्याख्या
4. अनुबंध के सिद्धांत एवं सीमाओं का उल्लेख
5. व्यक्तिलसी अधिकारों



1. अधिनियम की प्रभावशीलता- सितंबर 1872 से प्रभावी हुआ है अधिनियम इस्तिथि से पूर्व एवं अनुबंधों को प्रभावित नहीं करता है अर्थात यह भूतकालीन प्रभाव से लागू नहीं होता है इसलिए 1 सितंबर 1872 से पूर्व किए गए किंतु इस तिथि के बाद परिवर्तित अनुबंधों पर नहीं होता है यह अधिनियम जम्मू एवं कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे राज्य में लागू है


2. पूर्ण एवं सर्वांगीण नहीं- यह अधिनियम पूर्ण एवं पूरा नहीं है पर्याप्त भी नहीं है यह केवल अनुबंध के सामान्य सिद्धांत तथा कुछ विशिष्ट अनुबंधों की व्याख्या करता है इसमें व्याख्या से सम्मिलित कई महत्वपूर्ण अनुबंधों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है विनिमय साध्य विलेख बीमा साझेदारी माल विक्रय संपत्ति अंतरण आदि अनुबंधों के संबंध मैं इस अधिनियम में कोई व्याख्या नहीं है इन सभी के लिए अलग-अलग अधिनियम का निर्माण किया गया है!
                     “‘ यह अधिनियम अनुबंधों से संबंधित कानूनों के कुछ भागों को परिभाषित करता है तथा उस को संशोधित करता है सभी विधान कानून नियम जिन्हें इस अधिनियम द्वारा संशोधित या निरस्त नहीं किया गया है, इस अधिनियम से प्रभावित नहीं होते हैं” इस अधिनियम में यह भी कहा गया है कि यह अधिनियम व्यापार की किसी प्रथा या रीति रिवाज को प्रभावित नहीं करेगा धारा 1 के अनुसार यह अधिनियम पूरी तरह से पूर्ण नहीं है


3. अनुबंध से उत्पन्ना दायित्व की व्याख्या- अधिनियम की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि यह अधिनियम उस दायित्व का नियम है जो अनुबंधों के परिणाम स्वरुप उत्पन्न होते हैं दूसरे शब्दों में यह अधिनियम अनुबंध आत्मक संबंधों के कारण उत्पन्न होने वाले दायित्व का नियम है! जो दायित्व अनुबंध के कारण उत्पन्न नहीं होते, उनके संबंध में यह अधिनियम लागू नहीं होता है! व्यवहार में कुछ ऐसे ही दायित्व उत्पन्न होते हैं!
उदाहरण के लिए, साले के आदेश से, अपराध पूर्ण कार्यो से, प्रन्यासी केसृजन से, पति-पत्नी के आपसी संबंध से भी पक्षकार के दायित्व उत्पन्न होते हैं! किंतु अनुबंध अधिनियम इन दायित्व की व्याख्या नहीं करता है!

4. अनुबंधों के सिद्धांत एवं सीमाओं का उल्लेख- अनुबंध अधिनियम की एक विशेषता यह भी है कि यह अधिनियम अन्य अधिनियम की भांति पक्षकारों के विस्तृत अधिकारों एवं दायित्व का उल्लेख नहीं करता है! इन अधिनियम की प्रथम 75 धाराओं में तो केवल उन सीमाओं एवं सिद्धांतों का उल्लेख किया गया है, जिन को ध्यान में रखकर पक्षकार अपना अनुबंध कर सकते हैं! यह अधिनियम पक्षकारों एवं अपने अनुबंधों के अंतर्गत अपने अधिकार एवं दायित्व उत्पन्न करने का अवसर प्रदान करता है! शर्त केवल यही है कि पक्षकार अपने अनुबंध करते समय देश में प्रचलित किसी भी अन्य राज्यनियम की व्याख्या का उल्लंघन ना करें!


5. व्यक्तिलक्ष्य अधिकार की व्याख्या- एक व्यक्ति से कानूनी अधिकारों को दो वर्गों में विभक्त किया जा सकता है प्रथम लोक लक्ष्य अधिकार तथा द्वितीय व्यक्ति लक्ष्य अधिकार व्यक्ति के विरुद्ध अधिकार व्यक्ति के लिए अधिकार जो किसी वस्तु के संबंध में संपूर्ण विश्व के विरुद्ध प्राप्त होते हैं वह लोक लक्ष्य अधिकार होते हैं दूसरी यह व्यक्ति लक्ष्य वीडियो अधिकार वह होते हैं जो एक व्यक्ति को किसी दूसरे व्यक्ति विशेष के विरुद्ध प्राप्त होते हैं! अनुबंध अधिनियम की विशेषता यह है कि यह अनुबंध के अंतर्गत एक पक्षकार के दूसरे पक्ष कार के विरुद्ध व्यक्तिगत अधिकारों एवं दायित्व की व्याख्या करता है, ना की संपूर्ण विश्व के विरुद्ध उसके अधिकारों की तथा दायित्व की!

उदाहरण-:

राम श्याम से एक कार एक लाख रुपए में खरीदा है अनुबंध में राम को श्याम से कार प्राप्त करने का अधिकार है तू श्याम को भी कार देकर राम से एक लाख रुपए प्राप्त करने का अधिकार है यह एक दूसरे के व्यक्ति लक्ष्य अधिकार हैं

 

अनुबंध के कानून क्षेत्र-

अनुबंधों का कानून ठहराव का संपूर्ण कानून नहीं है और ना यह सभी दायित्वों का ही संपूर्ण कानून है इसका कारण यह है कि यह केवल उन ठहराव का कानून है जो दायित्व उत्पन्न करते हैं और जीन दायित्व की उत्पत्ति ठहराओ से होती है

1. अनुबंधों का कानून ठहराव का संपूर्ण कानून नहीं है
2.अनुबंधों का कानून सभी दायित्वों का कानून नहीं है

1. संबंधों का कानून ठहराव का संपूर्ण कानून नहीं है- अनुबंधों का कानून सभी ठहराव का संपूर्ण कानून नहीं है क्योंकि अनुबंधों का कानून केवल उन पर लागू होता है जिसमें पक्षकारों के वैधानिक दायित्व उत्पन्न होते हैं अनुबंधों का कानून उन ठहराव पर लागू नहीं होता है जिन्हें पक्षकार अपनी इच्छा से वैधानिक संबंध है एवं दायित्व उत्पन्न करने के लिए नहीं करते हैं सामाजिक राजनैतिक घरेलू धार्मिक आदि ठहराव में सामान्य धारणा यह होती है की पक्षकार वैधानिक संबंध स्थापित करना नहीं चाहते हैं जब तक कि अन्यथा आशय ही प्रगट नहीं किया गया हो कहा गया है!
इसलिए कहा गया है अनुबंधों का कानून उन ठहराव का कानून है जो वैधानिक दायित्व उत्पन्न करते हैं

2. अनुबंधों का कानून सभी दायित्वों का कानून भी नहीं है- अनुबंधों का कानून सभी दायित्वों का कानून नहीं है इसका कारण यह है कि वह दायित्व केवल सुरक्षा से अनुबंध करने से ही उत्पन्न नहीं होते हैं के दायित्व निम्न कारणों से भी उत्पन्न होते हैं!

असभ्य आचरण से
न्यायालयों के निर्णय

उसे की स्थिति या आपसी संबंधों से
इसलिए कहा गया है अनुबंधों का कानून केवल उन दायित्व का कानून है जिनकी उत्पत्ति ठहराव से होती है!

मोटिवेशन बातें जानने तथा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें |

http://www.gyansager.com/2017/09/Warren-success-story.html

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