कैडबरी सफलता की कहानी(SUCCESSFUL STORY)

    कैडबरी सफलता की कहानी

    कैडबरी चॉकलेट परिचय

    कैडबरी का जन्म तथा बिजनेस

    कैडबरी कंपनी का निर्माण

    कैडबरी क्वालिटी में परिवर्तन

    कैडबरी प्रोडक्ट दूसरे देश में भेजा जाना

    जॉन कैडबरी का शोध कार्य

    कैडबरी चॉकलेट का भारत आना

    परिणाम

    कैडबरी चॉकलेट परिचय-


देखा गया है छोटे नहीं बड़े भी दूध फल तथा सब्जी खाने से बचते हैं लेकिन उनके सामने किसी मीठे को रखा जाए तो शायद ही वह उसे मना कर पाएंगे!
जी हां मैं बात कर रहा हूं डेरी-मिल्क की – इसका शानदार रंग चिकनी बनावट लाजवाब स्वाद महक जैसे बहुत से लाजवाब गुण है जो किसी को भी इसे खाने के लिए अपनी और आकर्षित करता है!
अगर चॉकलेट की बात की जाए तो सबसे पहले हमारे दिमाग में नाम आता है कैडबरी! वैसे तो मार्केट में कई सारे चॉकलेट मिल जाते हैं लेकिन कैडबरी जैसा कोई नहीं है! चाहे डेरी-मिल्क हो या फाइव-स्टार या जेम्स क्यों न हो! कैडबरी चॉकलेट को टक्कर देने के लिए कोई भी कंपनी उसके सामने खड़ी नहीं होती! अपने लाजवाब स्वाद तथा बेहतरीन बनावट के साथ कैडबरी अपने प्रोडक्ट को मार्केट मैं उतरता है!
तो आज हम कैडबरी चॉकलेट जगत के इतिहास के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी मुहैया कराएंगे तो चलिए जानते हैं इसके बारे में

    कैडबरी का जन्म तथा बिज़नस-

दुनिया में कई दशकों से राज करने वाले चॉकलेट कंपनी कैडबरी की शुरुआत एक बच्चे से हुई! जिसका नाम था जोन कैडबरी! जॉन का जन्म आज से 216 साल पहले ब्रिटेन के बरमिंघम में हुआ था! वह चर्च किसी भी धार्मिक संस्था से नहीं जुड़े हुए थे! उनकी एक अलग मान्यता होने की वजह से उन्हें समाज में अलग नजरिए से देखा जाता था! नहीं उन्हें किसी अच्छे स्कूल में दाखिला मिलता, नहीं अच्छी जॉब मिलती थी! यहां तक कि वे सेना में भी नहीं जा सकते थे! उनके पास अंत में एक ही ऑप्शन था अपना खुद का बिजनेस करना! इसलिए जान अपनी पॉकेट मनी के लिए एक कॉफी शॉप में काम करने लगे! और फिर आगे चलकर सन 1824 में उन्होंने अपना खुद का दुकान खोला! जहां वह कॉफी चाय तथा चॉकलेट ड्रिंक बेचा करते थे! कुछ साल के एक्सपीरियंस के बाद उन्हें पता चला कि चाय और कॉफी से ज्यादा उनके चॉकलेट ड्रिंक का डिमांड है! फिर सन 1831 में उन्होंने चाय और कॉफी को छोड़कर अपने चॉकलेट ड्रिंक पर ज्यादा फोकस करना शुरू किया जिससे उसकी डिमांड और बढ़ने लगी! उसी साल उन्होंने चॉकलेट की 16 और वैरायटी मार्केट में लागू की! और देखते ही देखते कुछ ही सालों में वे अपने चॉकलेट ड्रिंक की वजह से आसपास के जगह में फेमस हो चुके थे! 1841 मैं उन्होंने अपने भाई को भी इस बिज़नेस में उतारा!

    कैडबरी कंपनी का निर्माण-


दोनों ने मिलकर एक चॉकलेट कारखाने का निर्माण किया!
कैडबरी अपने टेस्ट के लिए पहचानी जाती है 1854 में क्वीन विक्टोरिया इनकी कंपनी को रॉयल वारंट का सर्टिफिकेट दिया! उस समय रॉयल वारंट सर्टिफिकेट केवल उसी कंपनी को मिलता था! जिसकी क्वालिटी अच्छी होती थी और जीन उत्पादों को राजा महाराजा भी अपने उपयोग में ला सकते थे! धीरे-धीरे कैडबरी अपने बेहतरीन उत्पादों की वजह से पूरे ब्रिटेन में प्रसिद्ध हो गई!
और फिर 1860 में बिजनेस में नोक-झोंक की वजह से दोनों भाइयों में टकराव आने लगे! तथा जॉब के भाई ने जॉन से अलग होने का फैसला किया! धीरे-धीरे जान की उम्र भी ढलती जा रही थी! और फिर उन्होंने कंपनी की कमान अपने दोनों बच्चों को दे दी!

    कैडबरी क्वालिटी में परिवर्तन-


किसी भी उत्पाद की सफलता को जारी रखने के लिए जरूरी है समय के साथ परिवर्तन का होना! जॉन के बच्चों ने कंपनी का कमान संभालने के बाद कंपनी के उत्पादन तथा उसके सामान में बहुत से परिवर्तन किए! जिससे वह काफी हद तक सफल रहे!

    कैडबरी प्रोडक्ट दूसरे देशों में भेजा जाना-


पूरे ब्रिटेन में कब्जा जमाने के बाद कैडबरी को 1870 में दूसरे देशों में भी भेजा जाने लगा! जॉन कैडबरी ने अपने रिटायरमेंट से पहले अपने प्रोडक्ट में एक ऐसी खोज करें! जिसने कैडबरी को एक नई ऊंचाई पर ला खड़ा किया!

    जॉन कैडबरी का शोध कार्य-


जॉन ने 1905 में कैडबरी डेरी-मिल्क स्थापना की! जिस पर शोध कार्य उन्होंने 1897 से ही आरंभ करें! यह डार्क कैडबरी के साथ कुछ नया बनाने मैं लगे हुए थे! उन्होंने चॉकलेट पाउडर में दूध और चीनी मिलाया! और जब इसके मिक्सचर को चखा गया तो इसमें कमाल का स्वाद था! और जब इसे सुखाकर चखा गया तो उसका स्वाद और भी जबरदस्त हो गया! कुछ इसी तरह कैडबरी की डेरी मिल्क चॉकलेट बनी! जो आज भी कैडबरी की चहेती चॉकलेट है!

    कैडबरी चॉकलेट का भारत आना-


1948 में आजादी के लगभग 1 साल के बाद कैडबरी ने भारत में भी दस्तक दी और यहां भी अच्छी क्वालिटी तथा अच्छी टेस्ट की वजह से लोगों की आदत बन गई! लोगों की जवानों पर अपनी एक छाप छोड़ गई! कैडबरी अभी चॉकलेट, बिस्किट बनाता है! दुनिया की बात करें तो 50 से ज्यादा देश मे कैडबरी का ही बोल बाला हैें!
यहां पर देखने वाली बात यह है कि कैडबरी की न्यू उस व्यक्ति ने रखी थी जिसे अपने मनपसंद स्कूल में पढ़ने की आजादी नहीं थी नहीं अपनी मनपसंद जॉब की आजादी थी! यह उनका दृढ़ संकल्प ही था कि आज उनकी कंपनी इस मुकाम पर हैं! देखा जाए तो कैडबरी की सक्सेस स्टोरी से बहुत कुछ सीखने को मिलता है और मिला भी होगा!

    परिणाम-


दृढ़ संकल्प होने पर व्यक्ति बड़े से बड़े मुकाम को भी प्राप्त कर सकता है! व्यक्ति के शरीर में एक्सटर्नल शक्ति कोई मायने नहीं रखती है, जब तक कि उसके अंदर आंतरिक शक्ति ना हो! आंतरिक शक्ति अर्थात इच्छा, दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास आदि ना हो! अगर व्यक्ति के अंदर आत्मशक्ति हो तो वह बड़े से बड़े मुकाम को भी हासिल कर सकता है, तथा व्यक्ति के अंदर आत्मशक्ति ही ना हो तो वह छोटे से छोटे मुकाम को भी हासिल नहीं कर सकता!

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