मनुष्य उत्पत्ति एक रहस्य

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मनुष्य उत्पत्ति एक रहस्य

Gyan sager
यह सवाल हमेशा हमारे मन में उठता रहता है ये सवाल बहुत रोमांचक है, क्योंकि उसके बारे में हर कोई जानना चाहता है जिससे इतनी बड़ी दुनिया खड़ी हुई। लेकिन इस सवाल के जवाब को लेकर कई मान्यताएं रही हैं।
 
हमारे हिन्दू धर्म के पुराण के अनुसार दुनिया के पहले व्यक्ति का नाम ‘मनु’ था वहीं पश्चिमी सभ्यता के अनुसार दुनिया का पहला व्यक्ति ‘एडेम’ था पुराण में कहा गया है कि मनु की रचना भगवान ब्रह्मा ने की थी। माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने दो लोगों को बनाया था, इसमें एक का नाम था ‘मनु’ और दूसरा ‘शतरूपा’। दुनिया में जितने भी लोग मौजूद हैं यह सभी मनु से उत्पन्न हुए हैं।
 
हमारे पुराणों के अनुसार जब ब्रह्मा ने देवों, असुरों और पित्रों निर्माण कर दिया।
 
इसके बाद वे शक्तिहीन महसूस करने लगे थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या बनाएं उसी समय उनके अंदर से एक काया उत्पन्न हुई वो उनकी तरह ही दिखने वाली परछाई जैसी दिख रही थी इसी को संसार का पहला मानव ‘मनु’ कहा गया था।
 
पश्चिमी सभ्यता के अनुसार बाइबल में भी ईश्वर के शरीर से एक परछाईं ने जन्म लिया हुआ था। इसे ‘एडेम’ का नाम दिया गया एडेम के साथ ही भगवान ब्रह्मा की ‘शतरूपा’की तरह ही पश्चिमी सभ्यता में भी ‘एम्बेला’ नाम के स्त्री का जन्म हुआ था दोनों सभ्यताओं में एक स्त्री और एक पुरुष के जन्म की बात कही गई है, यही बात दोनों सभ्यताओं को काफी भिन्न बनाती हैं।

खैर दोनों में जितनी भी सच्चाई हो लेकिन दोनों अपनी अपनी जगह सही हैं इसको स्पष्ट रूप से मैं एक उदाहरण के माध्यम से समझाने की कोशिश करना चाहता हू

उदाहरण

  1.             ऊर्जा क्या है?

  2.             भगवान क्या है?

 दोनों एक ही शब्द हैं मगर लोगों का बोलने का नजरिया अलग अलग है चाहे वह उर्जा हो या भगवान दोनों एक ही है धर्म आस्था तथा अपने विज्ञान के नाम पर इसका अलग-अलग नामकरण किया गया
     अगर किसी वैज्ञानिक से जाकर पूछा जाए!

  1.  उर्जा क्या है?

               तो उसका बेशक यही जवाब आएगा ऊर्जा हर एक तत्व विद्यमान होती है यह ना दिखाई देती है ना सुनाई देती है उर्जा को नहीं बनाया जा सकता है और ना ही इसका अंत किया जा सकता है यह हर एक वस्तु में विद्यमान होती है ऊर्जा से हम चल पाते हैं खाना खा पाते हैं उर्जा नहीं होगा तो धरती में मानव का केवल इतिहास ही रह जाएगा बिना उर्जा के मानव की उत्पत्ति होना नामुमकिन सी हो जाएगी


वहीं दूसरी तरफ अगर किसी पंडित से पूछा जाए! 
    2.  भगवान क्या है?
                     तो उसका भी यही जवाब आएगा भगवान हर तत्वों में विद्यमान है हाय देता है ना सुनाई देता है भगवान को ना बनाया जा सकता है और ना ही इसका अंत किया जा सकता है यह हर एक वस्तु में विद्यमान होता है भगवान की कृपा से हम चलते हैं खाना खाते हैं भगवान के बिना धरती में मानव उत्पत्ति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है

 भगवान और ऊर्जा दोनों की परिभाषाएं एक ही है जो कि मैंने उदाहरण के माध्यम से ऊपर बताया हुआ है दोनों का देखने, बोलने, सुनने तथा नामकरण करने का नजरिया अलग अलग है वैज्ञानिक इसी को उर्जा कहते हैं, और पंडित इसी को भगवान कहता है नाम अलग परिवेश अलग जगह पर यह होता है एक ही है.

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