महात्मा गांधी एक महान नेता[A GREAT LEADER]

महात्मा गांधी एक महान नेता


देश के राष्ट्रपिता के रूप में पहचाने जाने वाले महात्मा गांधी.

महात्मा गांधी स्वतंत्र भारत का सपना देखते हुए तथा अखंड भारत का निर्माण करने के उद्देश्य से 200 साल गुलाम रहे भारत देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करवाया! हालांकि देश को आजाद करवाने के पीछे बहुत बड़े-बड़े स्वतंत्रता सेनानियों का हाथ रहा है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति भी दे दी! महात्मा गांधी जी भारत माता के उन्हें महान पुत्रों में से एक थे, जिन्होंने देश में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन ही नहीं चलाया बल्कि उन्हें खदेड़कर भारत देश से बाहर निकाल दिया! महात्मा गांधी ने ही नमक आंदोलन तथा दांडी यात्रा जैसे महान आंदोलन किए! महात्मा गांधी ने 200 साल से गुलामी की जंजीरों में जकड़ी भारत माता को स्वतंत्र करवाया तथा भारतवर्ष की एकता में उनका बड़ा नाम जाना जाता है,
हमें आजादी से खुली हवा में सांस लेना बहुत अच्छा लगता है
लेकिन हमारी आजादी का श्रेय किसे जाता है?
हजारों देश प्रेमियों देश भक्तों ने हमारे देश के पर अपनी बलि चढ़ा कर हमें आजादी दी है, उन्हीं देशभक्तों में एक अनोखा व्यक्ति वह है, जो धोती कुर्ता तथा लाठी लेकर होंठों में एक मुस्कान लिए बिना शस्त्र हमारे लिए निस्वार्थ भाव से लड़ता रहा, भारतवर्ष में इन्हें कई लोग महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं, कई लोग बापू बुलाते हैं तथा सभी उन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं,

    परिचय माता-पिता जन्म तथा शिक्षा

महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के काठियावाड़ के पोरबंदर नामक ग्राम में हुआ था, इनके पिता का नाम करमचंद गांधी था तथा बहुत कम लोग जानते होंगे कि गुजरात के काठियावाड़ के वे एक दीवान थे, माता का नाम पुतलीबाई था, पुतलीबाई करमचंद गांधी की चौथी पत्नी थी तथा वह धार्मिक स्वभाव की थी, महात्मा गांधी अपने माता के साथ रहते हुए उनमें दया, प्रेम तथा ईश्वर के प्रति निस्वार्थ श्रद्धा के भाव उनमें बचपन से ही आ गए थे, जिस की छवि महात्मा गांधी के अंदर अंत तक दिखती रही ,
महात्मा गांधी की प्राथमिक शिक्षा काठियावाड गुजरात़ में हुई तथा मात्र 14 वर्ष की उम्र में उनका विवाह कर दिया गया, उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा माखन गांधी था, बहुत बहुत कम लोग जानते हैं कि महात्मा गांधी अपनी पत्नी से 1 वर्ष छोटे थे, जब 19 वर्ष के हुए तो उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए लंदन चले गए जहां से उन्होंने कानून में स्नातक प्राप्त किए! विदेशों में रहते हुए उन्होंने वहां के रीति-रिवाजों को अपनाया परंतु वहां की मांसाहारी खाना को नहीं अपनाया, अपनी माता की आज्ञानुसार तथा बौद्धिकता के अनुसार उन्होंने आजीवन शाकाहारी रहने का संकल्प लिया तथा वही स्थित शाकाहारी समाज की सदस्यता भी ली! कुछ समय पश्चात भारत लौटे तथा मुंबई में वकालत का कार्य आरंभ किया, जिसमें वह पूर्णता सफल नहीं हो सके! इसके पश्चात उन्होंने राजकोट को अपना कार्यस्थल चुना, जहां वह जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए वकालत के रसिया लिखा करते थे! इसके बाद भी 1893 को दक्षिण अफ्रीका की एक वकालत में चले गए, जहां उन्हें भारतीयों के साथ भेदभाव के समस्याओं का सामना करना पड़ा! यहां उनके साथ कोई अप्रिय घटना घटी, जिसने महात्मा गांधी की जिंदगी को समाज में होने वाले घटनाओं के प्रति झकझोर कर रख दिया!
इसके पश्च्यात में ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा भारत में हो रहे अत्याचार के विरुद्ध तथा अपने भारतवासियों के हित में प्रश्न उठाने आरंभ किए! सन 1906 मैं महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में थे, जहां पर उन्होंने जरू युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की! इसके उपरांत सन 1915 में वह सदैव के लिए स्वदेश वापस आ गए! जिस समय वह पहुंचे उस समय अंग्रेजों द्वारा चारों तरफ भारतवर्ष में अत्याचार हो रहा था! जमींदारों की शक्तियों से प्रभावित भारतीयों को बहुत कम भत्ता मिला करता था! जिससे देश में चारों तरफ गरीबी छा गई थी, तथा बीमारी फैल रही थी! गुजरात के खेड़ा गांव की स्थिति अकाल तथा अंग्रेजों के अत्याचार की वजह से अत्यंत दुखदाई थी! यही से गांधीजी की आजादी के महत्वपूर्ण भूमिका आरंभ हो गई!

    खेड़ा गांव में पहला आश्रम बनवाया

गुजरात के खेड़ा गांव में अपना पहला आश्रम बनवाया! महात्मा गांधी तथा उनके समर्थकों ने खेड़ा गांव में साफ सफाई का कार्य आरंभ किया तथा विद्यालय तथा अस्पताल का भी निर्माण किया! खेड़ा सत्याग्रह के कारण महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया तथा यह जगह छोड़ देने का आदेश दिया गया जिसके विद्रोहों में महात्मा गांधी के कई समर्थक तथा लाखों लोगों ने प्रदर्शन किया तथा गांधी जी के समर्थकों लाखों लोगों ने रेलियां निकाली तथा सत्याग्रह करने के लिए आवाज उठाई जिसके फलस्वरूप उन्हें रिहाई मिली! जिन जमींदारों ने अंग्रेजों के समर्थन में किसानों का शोषण किया तथा क्षति पहुंचाई उनके विरोध में कई प्रदर्शन हुए जिसका मार्गदर्शन गांधीजी ने स्वयं किया! पूरे देश के लिए निस्वार्थ सेवा तथा देशवासियों के प्रेम को देखते हुए लोगों ने उन्हें बापू कह कर संबोधित किया! खेड़ा तथा चंपारण में सत्याग्रह में सफलता पाने के बाद महात्मा गांधी पूरे देश के बापू बन गए!

    असहयोग आंदोलन

खेड़ा गांव को अंग्रेजों के अत्याचार से मुक्त कराने के बाद महात्मा गांधी ने देशवासियों के हित में अंग्रेजो के खिलाफ एक जंग छेड़ी! जिसमें उनके मुख्य हथियार सत्य अहिंसा और शांति थे!
Truth, non-violence गांधी जी द्वारा आरंभ किया गया! असहयोग आंदोलन
non corporation movement अंग्रेजो के खिलाफ ब्रह्मास्त्र साबित हुआ! असहयोग आंदोलन जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद और भड़क गया तथा उन्होंने इस हत्याकांड की कड़ी निंदा की! उनके अनुसार हिंसा को अनुचित बताया गया

    राजनीति में कदम रखा जाना तथा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

इसके बाद हो रही हिंसा को देखते हुए गांधी जी ने सरकारी संस्थाओं द्वारा देश में संपूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की ओर केंद्रित किया! 1921 में गांधीजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए तथा उन्होंने स्वदेशी नीति अपनाते हुए लोगों को विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने के लिए प्रेरित किया लोगों से खादी पहनने हेतु आग्रह किया! महिलाओं को भी अपने इस आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया! गांधी जी ने उन लोगों से जो अंग्रेजों के लिए काम कर रहे थे, तथा उनकी सरकारी नौकरी कर रहे थे, उनसे भी नौकरी छोड़ने का आग्रह किया,

    असहयोग आंदोलन वापस लिया जाना

असहयोग आंदोलन को पूरे देश में सफलता प्राप्त हुई बहुत से लोगों ने स्वदेशी नीतियों का अनुसरण किया है! दुर्भाग्यवश चौरीचौरा की हिंसात्मक कांड के बाद गांधी जी को असहयोग आंदोलन वापस लेना पड़ा तथा उन्हें 2 साल कारावास में व्यतीत करने पड़े! फरवरी 1924 में उन्हें रिहाई मिल गई,

    नमक आंदोलन दांडी यात्रा

कारावास के बावजूद गांधीजी तरह-तरह से देश में हो रही हिंसा आप को रोकने में कार्यरत रहे तथा उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को भी एक करने का पूर्ण प्रयास किया! 1928 में बापू ने कोलकाता के कांग्रेस अधिवेशन में भारतीय साम्राज्य को सत्ता देने की बात कही! विरोध किए जाने पर देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए असहयोग आंदोलन किए जाने की बात कही! इसके बाद महात्मा गांधी 1930 में नमक पर लगे कर के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन आरंभ किया! जिसमें दांडी यात्रा प्रमुख रही! इसके बाद देश की जनता को जागृत होते तथा जोश मैं देखकर सरकार ने बापू के साथ वार्तालाप किया, जिसका नतीजा गांधी संधि के रूप में आया, इस संधि के अनुसार आंदोलन समाप्त करने के बदले सभी राजनैतिक भारतीय कैदियों को आजाद किया गया! इसके बाद गांधी जी कांग्रेस का मुख्य चेहरा बनकर गुरमुख सम्मेलन मैं भाग लेने पहुंचा जिसका परिणाम नकारात्मक रहा! इसके बाद भारतीयों पर फिर से अत्याचार हुआ! उन्हें पुनः कारावास भेजा गया, उनके समर्थकों द्वारा यह आंदोलन जारी रहा तथा अंग्रेजों को असफलता का मुंह देखना पड़ा!

    दलितों के लिए शुरू किया आंदोलन

इसके बाद बापू ने 6 दिन का अनशन किया, उसके बाद दलितों के हित में एक आंदोलन आरंभ किया उन्होंने दलितों को हरिजन का नाम दिया! यह आंदोलन हरिजन आंदोलन कहलाया, परंतु यह सफलता ना पा सका, गांधी जी को नकार कर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को अपना प्रतिनिधि चुना! इसके बाद भी गांधीजी इनके समर्थन में लड़ते रहे,

    भारत छोड़ो आंदोलन

द्वितीय विश्वयुद्ध में उन्होंने अंग्रेजों को अहिंसात्मक रूप से समर्थन देने की बात कही, जिसके पक्ष में कोई ना था बाद में गांधी जी ने किसी भी और की पार्टी बनने से इंकार कर दिया तथा भारत छोड़ो आंदोलन को और तीव्र किया गया, यहां सर्वव्यापी आंदोलन में हिंसा तथा गिरफ्तारी भी हुई जिस के पक्ष में बापू कतई नहीं थे! गांधीजी ने संपूर्ण भारत को हिंसा से करो या मरो द्वारा स्वतंत्रता से लड़ने को कहा! गांधी जी तथा कांग्रेस के सदस्यों को पुनः गिरफ्तार किया गया! गांधीजी के लिए यह कारावास बहुत घातक रहा, इस समय वह बीमार भी हुए तथा कस्तूरबा का देहांत भी हो गया! उनके कारावास में रहते हुए भी भारत छोड़ो आंदोलन चला तथा संपूर्ण संपन्न भी हुआ! अंग्रेजों ने भारत को सत्ता देने का निर्णय भी लिया, लेकिन गांधीजी ने कांग्रेस को ब्रिटिश कैबिनेट के प्रस्ताव को ठुकराने को कहा क्योंकि यह प्रस्ताव भारत को विभाजन की ओर ले जा रहा था परंतु हिंदू तथा मुस्लिम में असंतोष को देखते हुए उन्होंने दिल्ली में आमरण अनशन किया तथा पाकिस्तान 55 करोड रुपए देकर अलग कर दिया गया!

    महात्मा गांधी की मृत्यु

महात्मा गांधी की हत्या का जिम्मेदार नाथूराम गोड़से था जोकि राष्ट्रवादी हिंदू था! जो गांधी जी को देश को कमजोर बनाने का जिम्मेदार मानता था! क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान को 55 करोड़ का भुगतान किया था! 30 जनवरी 1948 को रात्रि के वेल भवन में घूम रहे थे तभी नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी!
नवंबर 1949 में नाथूराम गोडसे तथा उनके साथियों को भी फांसी दे दी गई!

    परिणाम

महात्मा गांधी भारत देश के पहले एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने बिना शस्त्र उठाए अंग्रेजो को भारत से खदेड़कर बाहर भेज दिया! अपने 3 शस्त्र सत्य अहिंसा तथा शांति को अपने ढाल बनाएं अंग्रेजों से लोहा लिया तथा महात्मा गांधी द्वारा इन तीन शास्त्रों के दम पर उन्होंने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए!
हर एक व्यक्ति को अहिंसा तथा शांति और सत्य का मार्ग भी अपनाना चाहिए! यही जीवन जीने तथा सफलता का सही मार्ग है! सफलता का कोई सरल रास्ता नहीं होता! कठिनाइयां आती है, जो कठिनाइयों को पार कर लेता है, सफलता उनके कदम चूमती है,
जिंदगी में कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हें सलाम करें, तुम लोगों को सलाम करो ऐसा होने ही ना दो.


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सफलता की पहली और अंतिम सीढ़ी[STAIRS OF SUCCESS]

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