सफलता का बीज [SUCCESS LIFE NEED]

प्रगति के लिए जरूरी अपनों से दूर होना


    सफलता का बीज


आप जिनसे प्रेम करते हैं, सदैव उनके समीप रहना चाहते हैं. आप नहीं चाहते कभी अपनों से दूर होना पड़े, बिछड़ना पड़े परंतु एक समय के पश्चात् अपनों से दूर हो जाना उन्नति के लिए आवश्यक है. आप माता-पिता हैं, भाई बहन है, मित्र हैं अगर आप जीवन के हर एक परिस्थिति में अपने प्रिय का मार्गदर्शन करते रहेंगे.
तो आपके संतान, आपके भाई बहन, मित्र स्वयं अपना सही मार्ग चुना कैसे सीखेंगे?
मार्ग के कांटो से स्वयं को बचाना कैसे सीखेंगे?
इसलिए एक समय के पश्चात अपनों से बनाई गई दूरी स्वयं के लिए सदा लाभदायक रहती है.

    विफलता का मुख्य कारण


इच्छा मनुष्य के जन्म लेते ही उसके मन में जन्म ले लेती है. इच्छा जीवित रहने की, फिर प्रेम की, फिर आनंद की, फिर सफलता की परंतु सबकी इच्छा पूर्ण नहीं होती है. हर एक के पास अपनी इच्छा पूरी ना कर पाने के सैकड़ों कारण होते हैं. अपना लक्ष्य पूरा ना कर पाने के सैकड़ों बहाने होते हैं और हमे जान ही नहीं पाते कि कब हमारी असफलता के कारण हमारे ना प्रयास करने के बहाने बन गए. हम जो चाहते हैं उसे ना पा सकने के कारण यह नहीं होता कि अवरोध बड़ा था. कारण यह होता है कि हमारा प्रयास छोटा था. कभी कुएं से पानी निकाला होगा तो देखा होगा, कोमल रेशो से बनी हुई रस्सी भी कठोर पाषाण पर अपने निशान छोड़ जाती है और हर बढ़ता निशान उस पाषाण को और दुर्बल बना देता है. उसी प्रकार हमारा हर प्रयास हमें हमारे लक्ष्य के और पास ला सकता है. तो असफलता का कारण बाधा नहीं बल्कि प्रयासों की कमी है.
तो प्रयास कीजिए, आप जो लक्ष्य चाहेंगे. तो आपको मिलेगा. तो इच्छाशक्ति के बगैर कोई भी शक्ति किसी काम की नहीं होती. इच्छा शक्ति थोड़ी मेहनत होने पर आप अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.
विचार कीजिए.


सफलता का मार्ग


    सफलता का रहस्य


कभी-कभी कोई घटना मनुष्य के जीवन की सारी योजनाओं को तोड़ देती है और मनुष्य उस आघात को अपने जीवन का केंद्र मान लेता है.
परंतु क्या भविष्य में भविष्य की योजनाओं के आधार पर निर्मित होते हैं?
नहीं
जिस प्रकार किसी ऊंचे पर्वत पर सर्वप्रथम चढ़ने वाला उस पर्वत की तलाई में बैठकर जो योजना बनाता है.
क्या वही योजना उसे उस पर्वत की चोटी तक पहुंचाती है?
नहीं
वास्तव में वह जैसे जैसे ऊपर चढ़ता है उसे नई-नई चुनौतियां, नई-नई विडंबना, नए-नए अवरोध मिलते हैं. प्रत्येक पथ पर वह अपनेे पथ का निर्णय करता है. प्रत्येक पथ पर उसे अपनी योजनाओं को बदलना पड़ता है. कहीं पुरानी योजना उसे खाई में ना ढकेल दे. वह पर्वत को अपने योग्य नहीं बना पाता स्वयं को पर्वत के योग्य बनाता है.
क्या मनुष्य के जीवन में ऐसा ही नहीं है?
हां
जब मनुष्य जीवन में किसी एक चुनौती एक अवरोध को जीवन का केंद्र माना लेता है. अपने जीवन की गति को ही रोक देता है. वह जीवन में कभी सफल नहीं बन पाता और ना ही सुख और शांति प्राप्त कर पाता है.
अर्थात जीवन को अपने योग्य बनाने के बदले स्वयं को जीवन के योग्य बनाना ज्यादा उचित रहेगा. जिसे सुख शांति की अनुभूति होगी.
स्वयं विचार कीजिए.


जीवन को अपने योग्य बनाने के बदले स्वयं को जीवन के योग्य बनाना


    सही निर्णय कैसे लें?


जीवन का हर क्षण निर्णय का क्षण होता है. प्रत्येक पथ पर दूसरे पथ के विषय में निर्णय करना ही पड़ता है और निर्णय अपना प्रभाव छोड़ जाता है. आज किए गए निर्णय भविष्य में सुख तथा दुख को निर्मित करते हैं ना केवल अपने लिए बल्कि अपने परिवार के लिए भी अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुख तथा दुख का निर्णय करता है. जब कोई दुविधा सामने आती है तो मन व्याकुल हो जाता है अनिश्चय से भर जाता है. निर्णय का वह क्षण युद्ध बन जाता है और मन युद्धभूमि का कार्य करता है. ज्यादातर निर्णय दुविधाओं से निजात पाने के लिए नहीं बल्कि मन की शांति के लिए करते हैं.
क्या कोई दौड़ते हुए भोजन कर सकता है?
नहीं.
तो क्या युद्ध से जूझता हुआ मन कोई सही निर्णय ले पाएगा?
नहीं.
वास्तव में शांत मन से जो सही निर्णय करता है वह अपने लिए सुखद भविष्य बनाता है किंतु अपने मन को शांत करने के लिए जो व्यक्ति कोई निर्णय करता है तो वह भविष्य में अपने लिए कांटो भरा वृक्ष लगाता है.
स्वयं विचार कीजिए.

    वर्तमान में रहना शुरू करें


भविष्य का दूसरा नाम है संघर्ष. हृदय में आज एक इच्छा होती है और वह पूर्ण नहीं हो पाती तो ह्रदय भविष्य की योजना बनाता है. भविष्य में इच्छा पूर्ण होगी ऐसी कल्पना करता है परंतु जीवन ना भविष्य में है ना अतीत में. जीवन केवल वर्तमान में है परंतु हमें यह जानते हुए भी इतना सा सत्य नहीं समझ पाते हैं या तो हम बीते हुए समय के स्मरण को घेर कर बैठे रहते हैं या आने वाले समय के लिए योजनाएं बनाते हैं और जीवन बीत जाता है. एक सत्य हम अपने हृदय में उतार ले. कि ना हम भविष्य देख सकते हैं और ना ही उसे निर्मित कर सकते हैं. हम तो सिर्फ धैर्य के साथ स्वागत कर सकते हैं भविष्य का. तो जीवन का प्रत्येक पल जीवन से भर जाएगा.
स्वयं विचार कीजिए.

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